ब्रांडेड खाने पीने के सामान पर जीएसटी लग सकता है भले ही लोगो पैकेट पर न छपा हो

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ब्रांडेड खाने पीने के सामान पर जीएसटी लग सकता है भले ही लोगो पैकेट पर न छपा हो
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आम तौर पर आप अगर बाजार से ब्रांडेड फ्रोजेन फ़ूड खरीदेंगे तो उस पर जीएसटी लगता है लेकिन वहीं अगर आप ताज़ा फूड खरीदेंगे तो जीएसटी नहीं लगेगी। वैसे भी ताज़े फूड्स सेहत के लिए फायदेमंद होते हैं जबकि बासी फूड को खाने से डॉक्टर भी मना करते हैं। फ्रोजेन फ़ूड की preservation life आम तौर पर और भी ज़्यादा होती है।
लेकिन जीएसटी लगने के लिए फूड को रजिस्टर्ड ब्रांड के तहत बेचा जाना भी जरुरी है और वो भी यूनिट कंटेनर में। यूनिट कंटेनर वाले फूड को आम बोलचाल की भाषा में डिब्बाबंद फूड कहा जा सकता है। आपको जानकर आश्चर्य होगा की कुछ ऐसे भी जजमेंट है, जहाँ पैकेट्स में अगर फ़ूड मिलता है, जैसे कि हल्दीराम की भुजिया, उसे भी यूनिट कंटेनर में खाने पीने की सामग्री माना गया है।
चलिए अब frozen sea food की बात करते हैं। हुआ कुछ ऐसा कि आबाद फिशरीज (प्रा.) लि. फ्रोजेन सी फ़ूड की बिक्री आम लोगो को भी करती है और इंस्टिट्यूशनल कस्टमर्स को भी। इंस्टिट्यूशनल कस्टमर्स भी उत्पाद की खरीद आम लोगो की तरह ही बहुत सोच समझकर करते हैं और जाहिर है कि कानूनी तरीके से पैसे बचाने की कोशिश भी आम लोगो से ज्यादा करते हैं। कंपनी ने सोचा कि अगर इंस्टिट्यूशनल कस्टमर्स को फ्रोजेन सी फ़ूड बिना ब्रांड नाम के पैकेट में बेचा जाये तो जीएसटी नहीं लगेगी क्योंकि पैकेट पर लोगो नहीं है, यूनिट कंटेनर भी नहीं है। लिहाजा उन्होंने सोचा कि केरल, एडवांस रूलिंग अथॉरिटी से ही जवाब मांग लिया जाये ताकि बाद में डिपार्टमेंट के साथ किसी तरह का विवाद न हो। आखिरकार आजकल लिटिगेशन कॉस्ट नींद जो उड़ा देती है। अब आपको इस सिलसिले में ऑथोरिटी का नजरिया बताते हैं। उनका कहना था कि फ्रोजेन सी फ़ूड के पैकेट पर कंपनी का नाम, पता देना ही होगा और बाकी डीटेल्स भी देनी होगी FSSAI के नियमो के हिसाब से। कंपनी के नाम से ब्रांड को आसानी से कनेक्ट किया जा सकता है और [Australian Foods India (I’) Ltd., [2013(287) ELT 385(SC)] में सुप्रीम कोर्ट के आर्डर का हवाला देते हुए कहा कि नाम ही काफी है "visible manifestation of brand name is not compulsory on the package. Even an ordinary name is sufficient."
इसलिए अगर अगर फ्रोजेन सीफूड को इंस्टिट्यूशनल कस्टमर्स को बिना लोगो के भी सप्लाई किया जाता है, तो भी उसपर छूट नहीं मिलेगी और जैसे ब्रांडेड सीफूड पर जीएसटी चार्ज करते हैं, वैसे ही चार्ज करना होगा।


तो हमने क्या सीखा :
१. अगर कन्फ्यूज़न है तो विवाद से बचने के लिए राय लें।
२. डिपार्टमेंट का भी अब बिज़नेस ट्रांसक्शन को देखने का नजरिया बदल रहा है। वो अब form पर ही नहीं, substance पर भी ध्यान देते हैं।

डिस्क्लेमर :
आपको जीएसटी समझ में आये, आप निर्णय कर सके, आपके सोचने का तरीका बदले, इसलिए लीक से हटकर हमनें भाषा का नाटकीय रूपांतरण किया है। यह मेरा निजी विचार है, इसलिए informed decision  लेने के लिए आपको आबाद फिशरीज (प्रा.) लि. के केरल एडवांस रूलिंग अथॉरिटी की रूलिंग KER/44/2019 को पढ़ना चाहिए और अपने जीएसटी कंसलटेंट से सलाह मशविरा भी |