वक्त की कीमत को आप भी पहचानें , कहीं पड़ न जाये लेने के देने

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वक्त की कीमत को आप भी पहचानें , कहीं पड़ न जाये लेने के देने

वक्त की कीमत को आप भी पहचानें , कहीं पड़ न जाये लेने के देने

वक्त की अहमियत को लेकर न जाने कितने फिल्मी गीत और कहावतें हैं, लेकिन इसमें कोई दो राय नहीं कि हम भारतीय वक्त की पाबंदी को लेकर कम ही गंभीर दिखाई देते हैं। टालमटोल की आदत तो जैसे हमारे नस-नस में रच-बस गई है। आज का काम कल पर और कल का काम परसों पर धकेलने की हमें से कइयों की आदत सी बन गयी है। लेकिन यह आदत कभी भी भारी नुकसान से दो-चार करा सकती है और मैंने कइओ का नुकसान होते देखा भी है । कुछ ऐसा ही जीएसटी में भी हो सकता है |

मुझे लगता है की या तो ये व्यापारी बेपरवाह हैं या फिर इनको सही सलाह और गाइडेंस नहीं मिली है|

आपसे कुछ और तथ्य साझा कर रहा हूँ और उम्मीद करता हूँ कि आप भी मेरी इस बात का समर्थन करंगे और वो यह कि:-

  ज़्यादातर कारोबारी अपने रिटर्न की फाइलिंग या नोटिस का जवाब अधिकांश ड्यू डेट पर या उसके बाद | यह हमारे स्वाभाव में है और इस वज़ह से ड्यू डेट के नजदीक आते ही वो टेंशन में आ भी जाते है लेकिन यह भी उतना ही सच है की ज़्यादातर कारोबारी टैक्स चुराने में यकीन भी नहीं रखते है |

⊇  रिटर्न फाइल करने की आखिरी तारीख को सर्वर धीमा हो जाता है और कई बार वह बैठ भी जाता है। इससे हम तनाव में घिर जाते हैं।

⊇  स्क्रूटनी आने पर हम लास्ट डेट का इंतजार करते हैं। हमें लगता है कि इससे डॉकूमेंट कम देने होंगे और टैक्स भी कम लगेगा क्योंकि तब तो गहन जांच का मौका नहीं रहेगा।

⊇  अपील भी ड्यू डेट के आसपास ही फाइल करते हैं।

लेकिन यह तो आप भी मानेंगे अगर किसी वज़ह से कंप्लायंस नहीं होता है तो यह परेशानी का सबब भी होगा क्योंकि आपको टैक्स के साथ पेनाल्टी और ब्याज का भुगतान तो करना ही होगा और टेंशन होगी वो अलग से | मेरा यह मानना है कि जो जानकार होता है, वो कंप्लायंस भी कर लेता है और जो कंप्लायंस करता है, वो टेंशन में भी नहीं रहता है |इसलिए जीएसटी के कुछ प्रावधानों की जानकारी आपसे साझा करते है:

1. समय से जीएसटी रिटर्न फाइल नहीं करने पर लेट फीस का भुगतान करना होगा और रिटर्न अगर फाइल नहीं होता है तो गुड्स या सर्विस की जो सप्लाई की गयी है, उसपर इनपुट क्रेडिट भी नहीं मिलेगा | इससे व्यापारी की साख पर तो निश्चित रूप से असर पड़ेगा | 

2. वैलिडिटी पीरियड में अगर गुड्स गंतव्य स्थान पर नहीं पहुँचता है और रास्ते में अगर अफसर द्वारा गुड्स पकड़ा जाता है तो भारी-भरकम पेनाल्टी लगेगी |

3. अगर लगातार 6 टैक्स पीरियड का रिटर्न फाइल नहीं होता है तो जीएसटी नंबर अपने आप सरेंडर हो जायेगा |

4. जो लोग TRAN-1 27/12/2017 तक किसी भी वजह से फाइल नहीं कर पाये हैं उन्हें फिलहाल मौका नहीं मिला है, उसे फिर से फाइल करने का |

5. क्रेडिट नोट से जीएसटी एडजस्टमेंट और गुड्स को अप्रूवल पर भेजने तथा जॉब वर्कर से गुड्स मंगाने आदि की भी समय सीमा होती है।

यह कहा जा सकता है कि जो समय की क़द्र नहीं करेगा, काम को कल पर टालेगा, उसके परेशान होने की संभावना अधिक है | परेशानी आने पर हमारे पास कभी भी बहानों की कमी नहीं होती लेकिन उससे नुकसान तो कम नहीं हो जाता | लेकिन यह आदत आने वाले वक्त में परेशानी का सबब बनने वाली है क्योंकि अब हर काम लगभग ऑनलाइन  होता है और साथ ही साथ समय सीमा की बाध्यता भी होती है | इसलिए हर काम निर्धारित समय में ही करना होगा और आपको टालमटोल की आदत से बचना होगा और इससे बचा जा सकता है, अगर आप निम्नलिखित उपाय करें:

1. अपने डेस्क पर टैक्स के ड्यू डेट का कैलेंडर रखें और साथ ही नॉन कंप्लायेंस या अनुपालन न करने की सूरत में लेट फीस, पेनाल्टी क्या लगेगी उसका भी ब्यौरा जान कर रखें।

2. अगर ड्यू डेट पर ही रिटर्न फाइल करने की आपकी आदत बन चुकी है तो उसे बदलने की कोशिश करें और कुछ दिन पहले ही रिटर्न फाइल करने की तैयारी करें और अपनी इस कोशिश को लागू भी करें। इससे अंतिम समय में होने वाली टेंशन  बचा भी जा सकेगा और गलतियां भी कम होगी|

3. आप जैसे अपना रोकड़ (Cash Book) रोज मिलाते हैं वैसे ही डॉक्यूमेंट का मिलान भी समय समय पर करते रहे क्योंकि जीएसटी रिटर्न में इसका विवरण भी जाता है | साथ ही साथ उसे तरीके से रखना और जगह पर रखना भी होगा ताकि खोजने पर आसानी से मिल जाये | पेपर फाइलिंग रोज करें।

4. आपको यह पता होना चाहिए कि रिटर्न फाइल करने के लिए आपको अंदाजन कितने टैक्स का भुगतान करना पड़ सकता है और उसका पार्ट पेमेंट समय-समय पर करें। इससे ड्यू डेट पर बोझ नहीं पड़ेगा।

5. आप अपने कंसलटेंट, एकाउंटेंट आदि के संपर्क में रहें और उनसे टैक्स रिपोर्ट समय-समय पर देने को कहें और उसमें जो बदलाव या सुधार करना है उसे तुरंत करें।

इन सामान्य सी आदतों को यदि अपना लिया जाता है तो हम भारी तनाव की स्थिति से बच सकते हैं। हमारा काम सुचारू तरीके से चल सकता है। इसलिए वक्त की कीमत को पहचानने की निहायत ज़रूरत है।

पाकिस्तान के मशहूर ग़ज़ल गायक ग़ुलाम अली की एक ग़ज़ल है....

आज नहीं ये काम चलो कर लेंगे

आज नहीं ये काम चलो कर लेंगे

उसके चेहरे से आँखों को कल भर लेंगे

उस आहट पर कल मर लेंगे.....

लेकिन जीवन की वास्तविक सच्चाई से भारतीय मनीषी कबीर दास ने हमें सैकड़ों वर्ष पहले ही परिचित करा दिया था। वह कहते हैं:

काल करे सो आज कर

आज करे सो अब

पल में परलय होयेगी

बहुरि करेगो कब ?

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