जो पहले कभी नहीं हुआ वह भी हो सकता है

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जो पहले कभी नहीं हुआ वह भी हो सकता है

जो पहले कभी नहीं हुआ वह भी हो सकता है

कई बार हम यह मानकर चलते हैं कि जो पहले कभी नहीं हुआ वह आगे फिर कभी नहीं हो सकता। जाने-अनजाने में यह बात हमारे ज़ेहन में बैठ जाती है। लेकिन ऐसा हमेशा सच नहीं होता। राजनीतिक हालात को लें तो त्रिपुरा में पिछले 25 वर्षों से वाममोरचा का शासन था। वहां के मुख्यमंत्री माणिक सरकार को देश का सबसे गरीब और ईमानदार मुख्यमंत्री का तमगा मिला हुआ था। चुनावी जीत हमेशा उनके कदम चूमती थी। लेकिन विधानसभा चुनाव में भाजपा ने तमाम चुनावी गणित को गलत साबित करते हुए असंभव को संभव साबित किया। चुनाव में भारी जीत उसने दर्ज की।

यही हाल जीएसटी का भी है। हम कहीं न कहीं यह मानकर चलते हैं कि स्क्रूटनी, ऑडिट या इनवेस्टिगेशन हमारे साथ नहीं हो सकती। इसके फेर में पड़ने वाले कोई दूसरे हो सकते हैं। हम नहीं। लेकिन कई बार अंदाजा गलत हो जाता है। राजनीति में जैसे जनता की नब्ज पहचानने की जरूरत होती है वैसे ही टैक्स के मामले में नियमों को समझने और उसका पालन करने की आवश्यकता होती है। हम समय पर रिटर्न फाइल नहीं करते हैं या फिर अपने रिकॉर्ड अप-टू-डेट नहीं रखते हैं तो खतरे की तलवार हमपर बराबर लटकती रहती है। इसलिए ज़रूरी है कि कुछ सामान्य नियमों का पालन हम हमेशा करें।

एक नजर इनपर..

1. आपको जीएएसटी के जो नियम आप पर लागू होते है, उसे ध्यान से समझे और उसकी बारीकियों का समझते हुए अनुपालन करे|

2. आप ऐसे अकाउंटेंट या कंसलटेंट का साथ ले काबिल भी हो और भरोसेमन्द भी | साथ ही साथ आपकी टीम का ऊर्जावान होना भी जरुरी है क्योंकि आपको जीएसटी में समय समय पर रिटर्न लगाना भी है और इनपुट क्रेडिट का मिलान भी करना है |

3. अगर कुछ भी बदलाव आता है जिसका असर आपके व्यापार पर पड़ सकता है, उसकी जानकारी आपको कैसे होगी, इसके बारे में सोचे और रास्ते निकाले |

4. यह टेक्नोलॉजी, सोशल मीडिया का युग है और इसका असर हर किसी पर पड़ा है, चाहे वो राजनैतिक दल हो या फिर व्यापारी | आपको इससे मानना होगा और जो बदलाव काम करने के तौर तरीके में करना है, वो करना ही होगा, अगर मैदान में टिके रहना है तो | समय समय पर ट्रेड फेयर में जाते रहे |

5. आप जीएसटी अफसर को अपना प्रतिद्वंदी माने क्योंकि वो भी कोशिश करेंगे की आपकी गलतियां निकालने की तभी तो वो जीतेंगे | इसलिए आपको उनकी सोच के अनुसार अपने रिकार्ड्स और बुक्स को रखना चाहिए | वो क्या रिकार्ड्स खंगालते है या फिर क्या जानकारी चाहते है, इसकी जानकारी आपको अपनी एसोसिएशन की मीटिंग में जाने से या व्यापारिक मित्रो से बातचीत से हो जाएगी | साथ ही साथ आप अपनी बुक्स ऑफ़ एकाउंट्स और रिकार्ड्स को रोज की रोज बनाये यानि बिल्कुल वैसे ही जैसे की रोकड़ बनाते है |

पहले न होने वाली स्थिति के सामने आ जाने पर कम से कम आप खुद को यह दिलासा न दें कि..

ये जीवन है, इस जीवन का यही है, यही है रंग रूप

थोड़े गम हैं, थोड़ी खुशियां, यही है, यही है छांव धूप

आपको तो हर बाधा को पार करना होगा और फिर से नये दमखम के साथ आगे बढ़कर गाना होगा...

रुक जाना नहीं, तू कहीं हार के

कांटों पे चलके मिलेंगे साये बहार के

  यहाँ हम प्रतीकात्मक रूप से कह रहे है और हमारा कोई भी कोशिश किसी के दिल को ठेस पहुंचाने की नहीं है | हमारा एकमात्र उद्देश्य है की टैक्सपेयर कंप्लायंस करे ताकि उन्हें ब्याज और पेनाल्टी का भुगतान नहीं करना पड़े और उनके चेहरे हँसी ख़ुशी से खिले रहे | हमारा मानना है की अफसर बेवजह किसी को परेशान नहीं करते है और उन्हें सख्त होना पड़ता है ताकि कंप्लायंस भी होता रहे और सरकार को सही एवं पूरा टैक्स सही समय पर मिलता रहे |