{Case Study} जीएसटी अफसर टैक्सपेयर के मोबाइल फ़ोन और कार को सम्मन में बुलवाये जाने के दौरान क्या सीज कर सकते है ?

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{Case Study} जीएसटी अफसर टैक्सपेयर के मोबाइल फ़ोन और कार को सम्मन में बुलवाये जाने के दौरान क्या सीज कर सकते है ?
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सजग रहें, सावधान रहें, जानें अपने अधिकार
सावधानी बरतें, डिपार्टमेंट की सख्ती का बन न जायें शिकार

कल्पना कीजिए एक घटना जहाँ किसी की कार का चालान एक पुलिसवाला महज इसलिए कर देता है क्योंकि ‘नो एंट्री’ वाले रोड में गाड़ी इस तरह पार्क की थी कि जिससे अफसर को लगा की उसने नो एंट्री रोड पर कार को ड्राइव किया होगा। अगर आप पार्क स्ट्रीट की बात करे तो सुबह 1 बजे तक पार्क स्ट्रीट से निकला जा सकता है जबकि 1 बजे के बाद पार्क स्ट्रीट में घुसा जा सकता है। शाम 4 बजे कार की पार्किंग कुछ इस तरह थी कि जिससे लगा की उसने पार्क स्ट्रीट में घुसने की बजाय निकलने की कोशिश की हो इसलिए अनुमान के आधार पर चालान कर दिया। बात बढ़ गयी तो CCTV देखा गया तो प्रूफ़ हो गया की उस व्यक्ति ने नो एंट्री को नहीं तोड़ा। चालान से बच गए मगर परेशानी तो हुई न। हालाँकि अगर वास्तव में कोई ‘नो एंट्री’ रोड पर कार ड्राइवर करे तो तो क्या अफसर को अधिकार है चालान करने का। तो रिप्लाई है "हाँ ”। उनकी (अफसर) गलती थी कि उन्हीने जल्दीबाजी में, उतावलेपन में चालान कर दिया। लेकिन हमेशा (अफसर) वो गलत नहीं होंगे और न ही होते है, यह आप जानते तो है पर मानना भी होगा |

GST Case Study:

अब आप इसी आधार पर जीएसटी अफसर के एक डिसिजन पर चर्चा करते हैं।

Source: Prakashsinh Hathisinh Udavat vs State of Gujarat in Hon’ble High Court of Gujarat

ऐसा हुआ कि बिजनेसमैन श्री प्रकाश को किसी इन्वेस्टिगेशन में पूछताछ के लिए Summon दिया गया। प्रकाश जी तय समय पर अपनी कर में बैठकर मोबाइल फ़ोन के साथ अफसर से मिलने चले गए। पूछताछ के दौरान अफसर और प्रकाश जी में माहौल तनावपूर्ण हो जाता है और अफसर असिस्टेंट कमिश्नर के पास जाते हैं। कहते है कि ऐसा प्रतीत हो रहा है कि प्रकाश जी ने टैक्स की चोरी की है, इसलिए बेहतर होगा की सरकार को रेवेन्यू को नुकसान न पहुंचे, इसलिए CGST Act 2017 के धारा 67(2) के तहत उनके मोबाइल फ़ोन और जिस कार से वो आये हैं, उसे जब्त कर लिया जाये। इसके बाद असिस्टेंट कमिश्नर फॉर्म INS 02 इश्यू करते हैं और मोबाइल फ़ोन और कार का seizure कर लिया जाता है, इस आधार पर कि एक्ट में THINGS शब्द भी लिखा है।

प्रकाश जी कुछ नहीं कर पाते हैं। बेबस होकर अपने कंसलटेंट के पास जाते हैं, पर उन्हें वहां गोलमोल जवाब मिलता है। पर वो अपने आप को बहुत अपमानित महसूस कर रहे होते हैं और उन्हें यह भी लगा कि अफसर ने अपनी पावर का नाजायज़ फायदा उठाया है।

वो हाई कोर्ट का रुख करते हैं।

जहाँ उन्हें यह अच्छे तरीके से समझ आ जाता है कि अफसर के पास अधिकार है कि वो कार और मोबाइल फ़ोन को Seize कर सकते हैं, लेकिन उन्हें नियम कायदो को मानना होगा। मनमानी नहीं कर सकते हैं।

हालाँकि प्रकाश जी के केस में असिस्टेंट कमिश्नर को कार और मोबाइल फ़ोन को रिलीज़ करने का आर्डर दिया गया क्योंकि उन्होंने कुछ मूलभूत गलती की थी।

जैसे कि:

(1) Seizure करने के लिए असिस्टेंट कमिश्नर को जॉइंट कमिश्नर की permission लेनी होती है, लेकिन उन्होंने नहीं ली थी;

(2) Form INS 02 के सभी कॉलम को तरीके से fill up करना चाहिए था पर नहीं किया। अफसर अगर कोई सामान (Things) जब्त करता है तो उसे यह लिखना होता है कि उसका मेक / मॉडल क्या है, किस मेक का है। लेकिन उन्होंने नहीं लिखा।

(3) Seizure डिपार्टमेंट में किया गया। कोई सामान किसी जगह, जो कि जीएसटी में रजिस्टर्ड नहीं है, वहां छुपाकर रखा जाता है तो उस जगह के बारे में बताना होता है। पर अफसर ने जगह के बारे में INS 02 में लिखा ही नहीं। इस बात का जवाब भी नहीं दे पाए कि क्या कोई व्यक्ति डिपार्टमेंट में सामान को छुपा सकता है।

(4) Seizure तब रिकवरी प्रोसीडिंग करनी होती है पर उसके लिए Tax Determination भी जरुरी होता है, उन्होंने ऐसा किया ही नहीं।

(5) विटनेस का पूरा एड्रेस क्या है, क्या उसे खोजे जाने पर वो कहाँ मिलेगा? यह पूछे जाने पर भी जवाब नहीं मिला था।

कुल मिलकर कहें तो अफसर को अपने उतावलेपन की वजह से खुद के नजर में शायद शर्मशार भी होना पड़ा होगा लेकिन इससे प्रकाश जी को कोई फ़ायदा नहीं होने वाला | हालाँकि वो अच्छी तरीके से जानते थे, अभी रोजमर्रा में, जब तक इन्वेस्टीगेशन चल रही है, कम से कम तब तक, उन्हें उनके (अफसर) पास ही जाना होगा और अफसर अगर नाराज़ हो गये, उनका ईगो हर्ट हो गया तो उन्हें reprisal (प्रतिहिंसा) का शिकार होना पड़ सकता है। प्रकाश जी ने समझदारी दिखाई | इसलिए सेक्शन 157 के तहत आर्डर न पास करने की गुजारिश जज साहब से की| जज साहब ने भी व्यहवारिकता को समझा और अपने आर्डर में असिस्टेंट कमिश्नर पर कोई टिपण्णी नहीं की। लेकिन ऐसा औरों के साथ न हो, इसलिए राज्य के चीफ सेक्रेटरी को जानकारी दी और कहा की इससे कैसे बचा जा सकता है, इसके लिए उचित कदम उठाया जाये और मोबाइल फ़ोन और कार को तत्काल रिलीज़ करने का आर्डर दिया जिसका पालन भी साथ साथ हुआ |

Disclaimer:

आप जीएसटी को आसानी से समझे? इसलिए इस केस स्टडी को कहानी का रूप दिया गया है और अपने डिपार्टमेंट के अनुभव और जीएसटी के नॉलेज के आधार पर कुछ कल्पना का सहारा भी जरूर लिया गया है।

Concluding Remarks:

यह निश्चित है कि अगर आप जानकार होंगे तो सावधानी जरूर बरतेंगे। चूँकि हम आपके दोस्त हैं, इसलिए आपको सावधान करना हमारा फर्ज है | लेकिन हम आपसे कहेंगे कि आप जीएसटी के नियमों को बारीकी से जानिए जरूर क्योंकि आने वाले समय में डिपार्टमेंट अफसर कंप्लायंस ऑडिट करेंगे, Return Discrepancy से डिमांड तो ASMT 10 की नोटिस से ही कर लेंगे।

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इस केस स्टडी को दोस्त विकाश धनानिया ने लिखा है |

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